कोलारस के उपचुनावों में घमासान.. बीजेपी-कोंग्रेस परेशान

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कोलारस उप चुनाव: राजनीतिक दलों से नाराज मतदाता
युवा महिला प्रत्याशी मनीषा वर्मा की दावेदारी ने मचाई सनसनी
बदल सकते हैं समीकरण, भाजपा कांग्रेस की बढ़ी चिंता
शिवपुरी/ कोलारस।


जैसे जैसे समय नजदीक आ रहा है कोलारस उप चुनाव के लिये भाजपा एवं कांग्रेस नेताओं की बेचैनी बढ़ती जा रही है, लेकिन फिलहाल कुछ रोज से राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ने का कारण यह नहीं बल्कि अचानक कोलारस में एक युवा महिला दावेदार मनीषा वर्मा को लेकर है।

वादे और जुमले में फंसने वाले नहीं इसलिए लिया निर्णय

 

कोलारस के स्थानीय जागरूक लोगों ने इस उप चुनाव के लिये महिला पत्रकार मनीषा वर्मा के नाम पर विचार करते हुये उन्हें इस उपचुनाव में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का मन बना लिया है और अगर ऐसा होता है तो यह निःसन्देह यहाँ के बड़े राजनीतिक दलों के लिए चिंता का सबब बन सकता है। कोलारस के मतदाता इन उप चुनावों के जरिये राजनेताओं को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि वह इस बार वादे या जुमले में फंसने वाले नहीं हैं।

शिवपुरी में पीएचडी कर रहीं
दरअसल मनीषा वर्मा पत्रकार हैं साथ ही पिछले कुछ समय से पत्रकारिता के साथ करेरा में सामाजिक और शिवसेना की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। मनीषा फिलहाल शिवपुरी में रहतीँ हैं और पीएचडी कर रहीं हैं।

जातीय और सामाजिक समीकरण वर्मा के पक्ष में

राजनीतिक और जातीय समीकरण को देखा जाए तो मनीषा कोलारस उप चुनाव के लिये फिट भी हैं, क्योंकि वह जिस समाज से आतीं हैं उसके कोलारस में 30 से 35 हजार वोटर बताये जा रहे हैं इसके अलावा जिस सहरिया समाज पर मुख्यमंत्री डोरे डाल रहे हैं उस समाज मे भी मनीषा पकड़ बना सकतीं हैं।

युवा और सुशिक्षित उम्मीदवार की चाह

सिर्फ यही नहीं स्थानीय कई लोग यह भी कहते हैं कि विकास की दृष्टि से कोलारस सिर्फ इसलिये पिछड़ा रहा क्योंकि यहां कभी भी किसी राजनीतिक दल ने सुशिक्षित युवा उम्मीदवार को मौका नहीं दिया। मतदाताओं का कहना है कि कोलारस को भाजपा या कांग्रेस ने सिर्फ वोट बैंक मात्र समझा जिसका अब जवाब देने का वक्त आ गया है। यूं तो अगले साल मनीषा के करेरा से चुनाव लड़ने के कयास यहां खुलेआम सुने जा रहे थे, लेकिन अब जब इसी जिले की विधानसभा कोलारस में चुनाव आन पड़े तो मनीषा के समर्थक उन्हें कोलारस से ही अपनी राजनीति की शुरआत करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गए हैं।

राजनीतिक कार्यकर्ता भी सम्पर्क में

सूत्रों के मुताबिक मनीषा वर्मा के कोलारस से चुनाव लड़ने की अटकलों के बाद क्षेत्र के कई भाजपा और कांग्रेस के लोगों ने उन्हें समर्थन देने का न सिर्फ मन बनाया वरन खुल कर मनीषा के पक्ष में काम करने का भरोषा भी दिलाया है।

क्षेत्रीय लोगों से चर्चा कर निर्णय लेंगी मनीषा
इस बारे में जब सुश्री वर्मा से बात की गई तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कोलारस में जनता भाजपा और कांग्रेस से खासी नाराज है, लिहाजा उनके पास कई क्षेत्रीय लोगों की तरफ से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव आया है जिस पर वह सभी से चर्चा के बाद निर्णय लेंगी। कुलमिलाकर सुश्री वर्मा ने सीधे तौर पर चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया। साफ है अगर बकौल सुयोग्य और शिक्षित प्रत्याशी के रुप मे मनीषा उप चुनाव के रण में उतरतीं हैं तो चुनाव काफी दिलचस्प हो जाएंगे।

दो की लड़ाई में तीसरे को फायदा
स्थानीय लोग तो यहां तक कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई में तीसरे विकल्प को लाभ मिल सकता है। क्षेत्रीय और जातीय समीकरण में अचानक मनीषा वर्मा की दावेदारी की खबर के बाद भाजपा और कांग्रेस नेताओं के भी कान खड़े हो गए हैं।

राजनीतक दलों को सबक सिखाने की हवा
कोलारस की जनता राजनीतक दलों को सबक सिखाने इस बार कमान किसी निर्दलीय को दे दे तो जरा भी आश्चर्य नहीं।

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