आधार से हर आदमी पर हर समय सरकार की नजर

0
13
आधार से हर आदमी पर हर समय सरकार की नजर

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच में आधार मामले की सुनवाई बुधवार को शुरू हुई। सुनवाई के दौरान आधार पर कई सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि बायोमीट्रिक डेटा केंद्र सरकार के पास है। इससे हर व्यक्ति पर हर वक्त सरकार की नजर है। यह पुलिसिया व्यवस्था है। सुप्रीम कोर्ट सुनिश्चित करे कि आधार न होने पर किसी व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रखा जाए।आधार से हर आदमी पर हर समय सरकार की नजर

‘संविधान सरकार को नहीं देता अधिकार’ : याचिकाकर्ता के वकील श्याम दीवान ने कहा कि सरकार आधार से चाबी अपने हाथ में ले रही है। इससे एक सिविल डेथ की स्थिति बनेगी। बुनियादी सुविधाओं को आधार से लिंक किया गया है। बिना आधार के कोई समाज में नहीं रह सकता। आधार लोगों की निजता को खत्म कर रहा है। आधार एक तरह से सरकार और नागरिक के संबंधों के उलट है। इस तरह लोगों के स्वाभाविक और जरूरी अधिकार भी आधार पर निर्भर हो जाएंगे। क्या संविधान सरकार को इतना बड़ा अधिकार देता है/ संविधान दासता को स्वीकार नहीं करता। क्या भारत का संविधान इस बात की इजाजत देता है कि हर गतिविधियां रेकॉर्ड पर हो/ किसी की स्वायत्तता सरकार उससे छीन नहीं सकती। ये वैकल्पिक तो हो सकती है।

‘कई मजदूरों, कामगारों के पास आधार नहीं’ : याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव कर रिटर्न भरने के लिए आधार को अनिवार्य बनाया है। मोबाइल फोन को आधार से लिंक किया जा रहा है। बैंक अकाउंट खोलने, इंश्योरेंस पॉलिसी, म्युचुअल फंड आदि के लिए आधार को अनिवार्य बनाया जा रहा है, जबकि देश में बड़ी संख्या में ऐसे मजदूर और कामगार मौजूद हैं जिन्होंने अभी तक आधार नहीं बनवाया है।

‘100 फीसदी नहीं हो सकता मिलान’ : उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई ने आधार के लिए सभी लोगों की 10 उंगलियों के फिंगर प्रिंट समेत तमाम डाटा स्टोर किए गए हैं। कई बार फिंगर प्रिंट से 100 फीसदी मिलान नहीं होता। ऐसे में अपने जायज अधिकारों से लोग वंचित रह जाएंगे। लोग सर्विलांस पर आ गए हैं। ये खतरनाक स्थिति है। आधार के कारण मूल अधिकारों में दखल दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के पास ये ऐसा टूल है, जो हर व्यक्ति का पूरा खाका सरकार के पास रखेगा, जबकि सरकार के पास ऐसे डाटा पर कोई कंट्रोल नहीं है। 2009 से 2016 के बीच इस मामले में जो कुछ हुआ है, उसे रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि अब निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार मान लिया गया है।

दीवान ने कहा कि 6 करोड़ 23 लाख लोगों का बॉयोमेट्रिक डाटा रिजेक्ट कर दिया गया। 15 साल तक की उम्र और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के फिंगर प्रिंट ठीक नहीं आते। ऐसे लोगों का क्या होगा/ सरकारी योजनाओं और सेवाओं के लिए आधार लिंक की अनिवार्यता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here